कंप्यूटर सिस्टम : computer, generation of computer , history and generation of computer, generation of computer 1st to 5th, basic computer knowledge

कंप्यूटर सिस्टम - Computer System
*प्रस्तावना ( introduction ) - कंप्यूटर सिस्टम अपने आसपास के वातावरण से बातचीत करने के लिए कंप्यूटर पेरीफेरल्स ( peripherals ) या इनपुट आउटपुट डिवाइस का उपयोग करता है । कंप्यूटर पेरीफेरल्स को मोटे तौर पर तीन श्रेणियों इनपुट डिवाइस , आउटपुट डिवाइस और इनपुट / आउटपुट डिवाइस में विभाजित किया जा सकता है ।

इनपुट डिवाईसेज़ (input devices) :-


कीबोर्ड (keyboard) :-कंप्यूटर कीबोर्ड सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले इनपुट डिवाइस में से एक है जिसके द्वारा संख्या ( numbers ) , अक्षर ( alphabets ) और विशेष करक्टेर ( Special characters ) को कंप्यूटर में इनपुट किया जाता है Keyboard का उपयोग कंप्यूटर को किसी विशेष कार्य आदेशित करने के लिये भी किया जा सकता है । एक Keyboard में alphabetic एवं numeric key होती है जिसका उपयोग texts एवं numeric data को input करने के लिये किया जाता है । Keyboard पर कई तरह की एडिटिंग कीज़ ( editing keys ) एवं फंक्शन कीज़ ( function kevs ) होती हैं जो सीधे फंक्शन को शुरू करने के लिए इस्तेमाल की जाती है । Cips Lock / Nurn Lock / Scroll Lock kev को टॉगल key कहा जाता है जो किसी विशेष फीचर को ON / OFF करने के लिये इस्तेमाल होती है । Ctrl Alt kcv को कॉम्बिनेशन key भी कहा जाता है क्यों की यह दूसरी keys के साथ कॉम्बिनेशन ( साथ में ) में प्रयोग में ली जाती हैं । अधिकांश Keyboard नर्स इनपट करने के लिए अलग संख्यात्मक पैड अनुभाग के साथ आते है।

पॉइंटिग डिवाइस (pointing device) :- ग्राफिकल यूजर इंटरफेस ( GUIs ) , जो कि बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए । जाते हैं , में स्क्रीन पर कर की स्थिति बताने के लिए पाइंटिग डिवाइस की  आवश्यकता होती है । पॉइटिंग डिवाइसेज़ निम्न प्रकार से हैं , जैसे : माउस (mouse) , टैकबॉल , टच पैड , टेक बिंद , ग्राफिक्स टैबलेट जोयस्टिक एवं टचस्क्रीन । अधिकतर पॉइटिंग डिवाइसेज़ कंप्यूटर से एक यूएसबी ( USB ) पोर्ट के माध्यम से जड़े होते हैं ।

माउस (mouse) :- mouse सबसे लोकप्रिय पॉइंटिग डिवाइस है जो यूजर एक हाथ के साथ कार्य ( मूव ) करता है । पुराने mouse में एक बॉल होती थी जो की mouse के निचले भाग की सतह पर होती थी | उसमे आंतरिक रोलर्स बॉल के मूवमेंट को सेंस करके mouse कोई ( केबल ) के माध्यम से कंप्यूटर को संचारित करते थे । आजकल ऑप्टिकल mouse के प्रचलन है जिसमे रोलिंग बॉल का उपयोग नहीं किया जाता है बल्कि इसके स्थान पर एक प्रकाश और छोटे सेंसर का उपयोग किया जाता है , जो मेज की सतह के एक छोटे से भाग से माउस की मूवमेंट का पता लगाने के लिए इस्तेमाल होता है । यह तार रहित या वायरलेस mouse  रेडियो तरंगों के माध्यम से कंप्यूटर के साथ संचार बनाए रखता mouse  में स्क्रॉल व्हील्स ( पहिये ) भी हो सकते है जो कि जीयूआई ( GUI ) के साथ काम करने में सहायक सिद्ध हो सकते है । पारंपरिक पीसी mouse में दो बटन होते है जबकि Macintosh ) मैकिनटोशमाउस में एक ही बटन होता है ।

टच पैड ( touch pad ) -: आजकल अधिकांश लैपटॉप कंप्यूटर्स में एक touch pad पॉइटिंग डिवाइस होती है । यूजर touch-pad  की सतह पर उंगली को  फिराकर या फिसला कर स्क्रीन परकर्सर को एक जगह से दूसरी जगह मूव ( move ) करते हैं । लेफ्ट एवं राईट क्लिक बटन पैड के नीचे स्थित होते हैं । touch-pad इस्तेमाल करने के लिये माउस कि अपेक्षा बहुत कम जगह कि जरुरत पड़ती है और इनमें कोई मूकिंग ( चलित ) भाग भी नहीं होता है ।

ट्रेक पॉइंट :- आईबीएम धिक पैड जिसमें प्रायः टच पैड के लिए जगह नहीं होती है , के अंदर प्रायः एक ट्रैक पॉईट होता है जो कि एक छोटी रबर प्रोजक्शन कीबोर्ड की keys के बीच एम्बेडेड होता है । ट्रेक पॉइंट एक छोटे जोयस्टिक की तरह कार्य करता है । इसे कर्सर की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है ।

ट्रैकबॉल :- टेकबॉल भी एक mouse की तरह ही होता है , जिसमें बॉल शीर्ष ( टॉप ) पर स्थित होती है । हम ट्रैकबॉल को रोल करने के लिए उंगलियों का उपयोग करते हैं और आंतरिक रोलर्स इस मूवमेंट को सेंस करके निर्देशों को कंप्यूटर तक पहुंचाते हैं । ट्रैकबॉल डेस्क पर स्थिर बनी रहती है , और इसकी वजह से हमें ट्रैकबॉल का उपयोग करने के लिए बहुत ज्यादा जगह की जरूरत भी नहीं होती है । आजकल ऐसे ऑप्टिकल टेकबॉल उपलब्ध हैं जिनमें रोलर्स की जरूरत नहीं होती हैं जिससे व्हील्स के गंदे होने की भी कोई समस्या नहीं होती है ।

 जॉयस्टिक्स ( joy sticks ) :- जॉयस्टिक्स और दूसरे गेम नियंत्रक ( कंट्रोलर्स ) भी पॉइंटिंग डिवाइस के रूप में कंप्यूटर से जोड़े जा सकते हैं । वे आम तौर पर खेल खेलने के लिए उपयोग किए जाते हैं ।

ग्राफिक्स टैबलेट :- ग्राफ़िक्स टैबलेट में इलेक्ट्रॉनिक लेखन क्षेत्र ( इलेक्ट्रॉनिक राइटिंग एरिया ) होता है जिसमे स्पेशल पेन को यूज़ किया जाता है । ग्राफ़िक्स टैबलेट के द्वारा आर्टिस्ट ग्राफिकल इमेजेज ( मोशन सहित ) बना सकता है । जैसा की परंपरागत ड्राइंग डिवाइस में किया जाता है | ग्राफिक्स टेबलेट का पेन दबाव के प्रति संवेदनशील ( प्रेशर सेंसिटिव ) होता है , जिसके परिणामस्वरूप ज्यादा या कम दबाव पड़ने पर वो अलग अलग चौड़ाई के ब्रश स्ट्रोक प्रदान करता है।


स्कैनर ( scanner ) :-एक स्कैनर मुद्रित पृष्ठ ( प्रिंटेड पेज ) या ग्राफ़िक का डिजिटलीकरण करता है , उसको छोटे छोटे पिक्सल्स वाली इमेज ( अलग अलग ब्राइटनेस एवं कलर के साथ ) में परिवर्तित करके कंप्यूटर संचारित ( ट्रांसमिट ) करता है । यह लेजर तकनीक का उपयोग करके प्रिंटेड इनफार्मेशन को इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में परिवर्तित करता है । स्कैनर किसी भी तरह की इनफार्मेशन को स्कैन कर सकता है जैसे हाथ से लिखा हुआ । टेक्स्ट , इमेज , चित्र , प्रिंटेड पेज आदि । एक बार स्कैन होने के बाद स्कैन्ड इनफार्मेशन को कंप्यूटर में स्टोर किया जा सकता है या फिर प्रिंटर के द्वारा प्रिंट किया जा सकता है ।


मिडी ( MIDI ) डिवाइस:- मिडी ( MIDI ) ( Musical Instrument Digital Interface - संगीत यंत्र डिजिटल इंटरफ़ेस ) एक प्रणाली है जो इलेक्ट्रॉनिक संगीत वाद्य यंत्र के बीच सूचना प्रसारित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है । इनके द्वारा मिडी कीबोर्ड को कंप्यूटर से जोड़ा जा सकता है और एक कलाकार कंप्यूटर सिस्टम द्वारा कैप्चर किये गए संगीत ( जो की एक समय क्रम में संगीतबद्ध किया गया है ) को प्ले कर सकता है ।


मैग्नेटिक इंक करैक्टरकोग्निशन ( MICR ) :- मैग्नेटिक इंक कैरेक्टर रेकोग्निशन कोड ( एमआईसीआर कोड ) एक करैक्टर पहचाने की तकनीक है जो मुख्य रूप से बैंकिंग उद्योग द्वारा प्रोसेसिंग को कम करने तथा चेक और अन्य दस्तावेजों की क्लीयरिंग में काम आता है । यह एमआईसीआर कोड करैक्टर को डिजिटल डाटा में बदल देता है जो कंप्यूटर समझ सकता है।

ऑप्टिकल मार्क रिडर ( OMR ) :- यह एक विशेष स्कैनर है जो पेंसिल या पेन द्वारा किए गए निशान के एक पूर्व निर्धारित प्रकार की पहचान करने के लिए उपयोग होता है । सबसे आम उदाहरण परीक्षाओं में प्रयोग किये जाने वाली उत्तर पुस्तिका , ओएमआर उत्तर पुस्तिका को स्कैन कर आउटपुट के रूप में परिणाम का उत्पादन करने के लिए प्रयोग किया जाता है । ओएमआर सर्वेक्षण , चुनाव और परीक्षणों में भी प्रयोग किया जाता हैं ।

ऑप्टिकल करैक्टर रेकोग्निशन ( 0CR ) :- ऑप्टिकल कैरेक्टर रेकोग्निशन ( ऑप्टिकल कैरेक्टर रीडर ) ( ओसीआर ) मशीन एनकोडेड फॉर्म में इमेजेज ( टाइप्ड ) , प्रिंटेड या हस्तलिखित टेक्स्ट का इलेक्ट्रानिक रूपांतरण करता है । यह व्यापक रूप से स्वचालित ( ऑटोमेटेड ) डाटा एंट्री के लिये इस्तेमाल किया जाता है जैसे 0CR यूज करके प्रिंटेड पेपर डाटा रिकार्ड्स , पासपोर्ट दस्तावेजों , बैंक चालान , बैक स्टेटमेट , कम्प्यूटरीकृत रसीदें , बिज़नस कार्ड , मेल आदि के डाटा को स्कैन करके डिजिटल फॉर्म में परिवर्तित कर सकते है । यह प्रिंटेड टेक्स्ट्स को डिजिटाइज़ करने का सबसे आम तरीका है जिससे यह डाटा इलेक्ट्रॉनिक रूप से एडिट सर्च , ऑनलाइन डिस्प्ले किया जा सकता है और इसके बाद इसको मशीन प्रक्रियाओं जैसे मशीन अनुवाद , टेक्स्ट की स्पीच में परिवर्तन और पाठ खनन ( text mining ) में उपयोग कर सकते है ।

बार कोड रीडर :-बार कोड एक वस्तु ( ऑब्जेक्ट ) को मशीन द्वारा विशिष्ट रूप से पहचानने का एक तरीका है । हर एक ऑब्जेक्ट को विशिष्ट रूप से पहचानने के लिये एक कोड दिया जाता है जिसे एक मशीन के द्वारा पढ़ा जा सकता है | मूल रूप से बारकोड को समानांतर लाइनों के बीच की दूरी एवं उनकी चौड़ाई में अंतर कर के विशिष्टता दी जाती थी लेकिन बाद में दो आयामी ( 2 डी ) मेआयत , डॉट्स , षट्कोण और अन्य ज्यामितीय आकारों ( पैटर्न ) में विकसित हुआ | ये विशेष रूप से शापिंग माल एवं डिपार्टमेंटल स्टोर में क्विक बिलिंग और सूची प्रबंधन ( इन्वेंटरी मैनेजर्मट ) के लिए उपयोग किया जाता है । एक विशेष हेडहेल्डडिवाइस ( बार कोड रीडर ) जो की एक कंप्यूटर / टर्मिनल से जुड़ा होता को बार कोड पढने और आइटम की पहचान । करने के लिये इस्तेमाल किया जाता है ।

स्पीच रिकग्निशन डिवाइस ( Microphone ) :- माइक्रोफोन एक इनपुट डिवाइस है जिसका इस्तेमाल ऑडियो डेटा को कंप्यूटर में इनपुट के लिए किया जाता है । यह एक वायर के द्वारा कम्प्यूटर से जुड़ा होता है जिसमें एक माउथपीस जैसी डिवाइस को ऑडियो कैप्चर करने के लिये उपयोग किया जाता है ।

वेबकैम ( वेब कैमरा ) :-यह कंप्यूटर से जुड़ा डिजिटल कैमरा है और कंप्यूटर के माध्यम से कंप्यूटर नेटवर्क में इमेजेज / वीडियो को कैप्चर करके कंप्यूटर में फीड करने में काम आता है डिजिटल कैमरा इनपुट वस्तु ( आइटम ) पर फोकस कर के पिक्चर लेता है और उसकोडिजिटल रूप में परिवर्तित करता है जिससे उसे कंप्यूटर में स्टोर किया जा सके ।

आउटपुट डिवाइस :-


मॉनिटर ( monitor ) :-आउटपुट की सॉफ्ट कॉपी को डिस्प्ले करने के लिए सबसे लोकप्रिय डिवाइस एक मॉनिटर है । यूजर मॉनिटर के द्वारा आउटपुट को स्क्रीन पर देख / पढ़ सकता है ।

CRT मोनिटर :- CRT मोनिटर एक परम्परागत आउटपुट डिवाईस रहा है । ये एक टीवी के समान होता है । एक CRT मॉनिटर एक बड़ी कैथोड रेट्यूब होती है जो कि अलग अलग पॉवर की इलेक्ट्रॉन बीम का उपयोग करके स्क्रीन के ऊपर पिक्चर बनाती है । मॉनिटर स्क्रीन का आकार विकर्ण ( diagonally ) रूप में इंच में मापा जाता है । मॉनिटर का रिज़ॉल्यूशन पिक्सल्स मापा जाता एक मॉनिटर कितने पिक्सल्स स्क्रीन पर होरीज़ॉटेली एवं वर्टिकली प्रदर्शित ( डिस्प्ले कर सकता है , ये उसका रिज़ॉल्यूशन कहलाता है , उदाहरण के तौर पर 800X600 , 1024X768 आदि । पिक्सल बहुत ही छोटे डॉट्स से बने होते हैं , जिन्हें मिला कर किसी भी इमेज को स्क्रीन पर प्रदर्शित किया जा सकता है । स्क्रीन पर डॉट्स के बीच की रिक्त जगह को डॉट पिच कहा जाता है । एक स्क्रीन में जितने छोटे डॉट पिच होंगे उसस्क्रीन पर पिक्चर की क्वालिटी उतनी ही बेहतर होगी ।

फ्लेट पैनल मोनिटर :- एक फ्लैट पैनल मॉनिटर आम तौर पर कंप्यूटर से आउटपुट प्रदर्शित करने के लिए एक एलसीडी ( लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले - Liquid Crystal Display ) का उपयोग करता है । LLCD कई पतली परतों ( लेयर ) से मिलकर बनती है , जब प्रकाश इन परतो से गुजरता है तो ये प्रकाश का ध्रुवीकरण करती हैं । एक परत ( लेयर ) का ध्रुवीकरण जिसमे की लम्बे पतले अणु ( long thin molecules ) होते है जिसको क्रिस्टल डिस्प्ले ( crystal display ) कहा जाता है , को पिक्सेल लेवल पर नियंत्रित किया जा सकता है जिससे पिक्सेल को हल्का या गहरा बनाया जा सकता है है । एलईडी ( LED ) प्लाज्मा डिस्प्ले भी एक फ्लैट पैनल तकनीक ही है जो कि आजकल सबसे अधिक इस्तेमाल की जाती है , विशेष रूप से लैपटॉप में ।
CRT मोनिटर की तुलना में फ्लैट पैनल बहुत हल्का होता है । आज जो सबसे अधिक और नवीनतम एलसीडी उपयोग की जाती है उसमें थीन फिल्म ट्रांजिस्टर ( thun film transistor TFT ) उपयोग में लिया जाया है एवं हर एक पिक्सेल की नियंत्रित किया जाता है इसलिए पिक्चर क्वालिटी व व्युइंग एंगल ( vicewing angle ) बहुत बेहतर हुआ है । LED मॉनीटर्स लाइट एमिटिंग डायोड यूज करते है जो मॉनिटर में परफॉरमेंस बुस्टर ( प्रदर्शन बढ़ाने वाली ) का काम करती है । LED मोनिटा मूल रूप से LCD मॉनिटर है जिसमे LED backlight लगा हुआ है जो LCDpanel को रौशनी वशक्ति प्रदान करता है ।

प्रिंटर ( printer ) :-पिंटर इनफामेशन को स्थायी पठनीय प्रारूप ( permanent readable format ) में प्रदान करता है जिसे हम हार्ड कॉपी कहते है। आम तौर पर आउटपुट एक कागज पर छपा ( प्रिट होता है । प्रिंटर आउटपुट की गुणवत्ता ( क्वालिटी ) डीपीआई ( डॉट्स प्रति इंच ) में गोपी जाती है । पिटर को मोटे तौर पर इम्पैक्ट ( impact ) और नॉन इम्पेक्ट ( non - Impact ) प्रिंटर में वर्गीकृत किया जा सकता है ।
A ) . इम्पैक्ट प्रिंटर :-


1. करैक्टर प्रिंटर :- इस प्रकार के प्रिंटर आम तौर पर एक समय में कौर पिटका सकते है । करैक्टर पिटर के सबसे लोकप्रिय उदाहरण डॉट मैटिक्स ( bor Matri ) प्रिटर और डेजी हाल ( Daisy Wheel ) पिटर है । डीट मैटिक्स प्रिंटर डर में छोटे छोटे electronarneficially सक्रिय पिन होते हैं और साथ में एकक वाला रिबन होता है जो इम्पैक्ट से इमेज बनाता है ये प्रिंटर आम तौर पर धीमें होते है और शोर भी करते है । इन प्रिटरोंकाइस्तेमाल बडे - बडे व्यापारिक या व्यवसायिक काम - काज में किया जाता है जहां 80 भोर 132 कॉलम के पेज पर सतत मेण ( continuous printing ) की जरुरत होती है ।

2. लाइन प्रिंटर :- लाइन प्रिंटर एक समय में एक पूरी लाइन प्रिंट करता हैं । परंपरागत रूप से लाइन प्रिंटर , चैन प्रिंटर और ड्रम प्रिंटर के रूप में बागकृत किये जा सकते हैं । इस प्रकार के प्रिंटर में एक प्रिंट हेड का उपयोग होता है जो की बहुत सारी पिना के विधुत यांत्रिकी electromechanical mechanism ) द्वारा पेपर तथा प्रिंट हेड के मध्य उपस्थित एक रिबन के बार - बार छूने से वाछित अक्षरों को पेपर पर प्रिंट आकार देती है । इसकी गति प्रिंटर के गणों के अनुसार 200 से 2000 लाइन प्रति मिनट हो सकता है ।

B. नॉन इम्पैक्टप्रिंटर :- आमतौर पर नॉन इम्पैक्ट प्रिंटर ज्यादा तेजी से प्रिंट करते है नॉन इम्पैक्ट प्रिंटर इम्पैक्ट प्रिंटर की तुलना में और बिना आवाज़ या कम अवाज़ के साथ काम करते हैं । ये करैक्टर को प्रिंट करने के लिये इम्पैक्ट वाली डिवाइस का उपयोग नहीं करते है । कुछ लोकप्रियनॉन इम्पैक्ट प्रिंटर नीचे दिए गए है ।

1. इंक -जेट प्रिंटर :- घर में उपयोग के लिए प्रिंटर का सबसे आम प्रकार ( common type ) कलर इक जेट प्रिंटर है । ये प्रिंटर प्रिंट हेड से स्याही की छोटी बूंदों के छिड़काव के द्वारा पेज की इमेज का निर्माण करते है रंग चित्र ( कलर इमेज ) बनाने के लिए प्रिंटर को स्याही के कई रंगों की जरूरत होती है । ये प्रिंटर अपेक्षाकृत सस्ता होते हैं , लेकिन प्रिंटर में यूज़ होने वाले कन्ज्युमेबल जैसे प्रिंटर कार्टिज की लागत उन्हें लम्बे समय के उपयोग  के हिसाब से महंगा बना देती है।


2. लेजर प्रिंटर :-लेजर प्रिंटर कार्यालय और व्यावसायिक प्रयोजनों ( पर्पस ) के लिए अच्छी क्वालिटी इमेजेज़  का उत्पादन करता है । लेजर प्रिंटर में फोटोसेंसेटिव   सामग्री के साथ लेपित ड्रम को चार्ज किया जाता है , उसके बाद एक लेजर एलईडीद्वारा हम परमेड़ा निर्माण किया जाता है । फिर डृम टोनर ( toner)के थू द्वारा घूमता है और कागज पर जमा हो जाता है और हीट के कारण कागज से जुड़ फ्यूज जाता है ।
ज्यादातर लेज़र प्रिंटर मोनोक्रोम  एक रंग काला होते हैं । परन्तु अधिक महगे लेजर प्रिंटर एक से अधिक रंग वाले टोनर काटे वाले भी होते हैं , जो रंगीन आउटपुट प्रदान करते हैं । लेजर प्रिंटर इंकजेट प्रिंटर की अपेक्षा अधिक तेज़ होते हैं , इन । प्रिटरों की गति को पेजेज प्रति मिनट ( ppm ) में मापा जाता है ।
3. थर्मल प्रिंटर :- यह स्पेशल पेपर पर प्रिंट करने के लिए गर्म तत्वों ( heat elements ) का उपयोग करता है । इसका सबसे ज्यादा उपयोग । एटीएम से निकलने वाली रसीद की छपाई में किया जाता है । हीट संवेदनशील कागज प्रयोग किया जाता है । इसकी मुद्रण लागत ( printing cost ) अधिक है इसलिए केवल पेशेवर कला और डिजाइन के लिए इस्तेमाल किया जाता है ।

प्लॉटर:- प्लॉटर का उपयोग इंजीनियरिंग की उच्च गुणवत्ता वाली कलाकृतियों , बिल्डिंग प्लान , सर्किट डाइग्राम आदि को प्रिंट करने के लिए किया जाता है । ये प्रिंटर ग्राफिक्स एवं कलाकृतियों को इक पेंस या इंकजेट की मदद से प्रिंट करते हैं । यह आमतौर पर इमप्लॉटर और फ्लैट बेड प्लॉटर होते हैं ।

स्पीकर :-यह मल्टीमीडिया कंप्यूटर का एक हिस्सा है । स्पीकर ध्वनि विस्तारक ( amplifiers ) का इस्तेमाल करते है जो कम्पन ( vibrate ) के द्वारा ध्वनि का निर्माण करते है और ऑडियो आउटपुट प्रदान करते है ।

मल्टीमीडिया प्रोजेक्टर :- लोगों की एक बड़ी संख्या के लिए कंप्यूटर आउटपट प्रदर्शित करने के लिए , मल्टीमीडिया प्रोजेक्टर का इस्तेमाल किया जाता है । यह व्यापक रूप से मीटिंग्स और कांफ्रेंस के दौरान प्रेजेंटेशन दिखाने के लिए उपयोग में लिया जाता है ।
इनपुट / आउटपुट डिवाइस : कई पेरीफेरल ( perintierals ) डिवाइस में इनपट और आउटपुट डिवाइस दोनों के रूप में इस्तेमाल किये जाने की क्षमता होती है । कुछ लोकप्रिय इनपुट - आउटपुट

डिवाइस निम्न प्रकार से है :


फैक्स मशीन : - फैक्स मशीन डॉक्यूमेंट को शून्य और एक की श्रृंखला ( जिसे बिट मैप भी कहते हैं ) में परिवर्तित करता है । जोकि सामान्य कंप्यूटर डेटा की तरह स्थानांतरित किया जा सकता हैं । जब फैक्स प्राप्त ( रिसीव ) प्राप्त होता है तो फैक्स मशीन भेजे गए डेटा को ( शून्य और एक ) को डॉट्स में परिवर्तित करती है और इमेज को दबा । प्रिंट करती है । इस प्रकार यह इनपुट और आउटपुट डिवाइस दोनों के रूप में काम करता हैं ।

मल्टीफंक्शन उपकरण ( एमएफडी ) : - ये एक ही डिवाइस भिन्न भिन्न प्रकार के कार्य कर सकती है जोकि प्रायः अलग अलग पेरीफेरल ( peripheral ) डिवाइस से होता है । मल्टीफंक्शन डिवाइस निम्न किसी भी कम से कम दो डिवाइस के कॉम्बिनेशन से मिल कर बनता है : प्रिंटर , स्कैनर , कापियर ( copier ) । इस तरह के डिवाइस का उदाहरण एक बहुआयामी ( multi - functional ) प्रिंटर है ।

मोडेम ( modem ) : - यह एक उपकरण है जो टेलीफोन लाइन पर प्राप्त एनालॉग संकेतों को डिजिटल सिग्नल में परीवर्तित करता है तथा कंप्यूटर के लिए इनपुट के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है । इसी तरह यह कंप्यूटर से प्राप्त जानकारी को टेलीफोन लाइनों द्वारा संचारित करता है।
--टचस्क्रीन डिस्प्ले और डिजिटल कैमरा आम इनपुट / बाहर उपकरणों के कुछ अन्य उदाहरण है ।

कंप्यूटर मेमोरी :-कंप्यूटर मेमोरी मानव मस्तिस्क के सामान है । कम्प्यूटर मेमोरी डाटा एवं इनफार्मेशन को स्टोर करता है । कम्प्यूटर मेमोरी एक भंडारण स्थान ( स्टोरेज स्पेस ) है जहाँ वह डाटा और इनफार्मेशन रखा जाता है जिसको प्रोसेस ( संसाधित ) किया जाना है । मेमोरी तीन प्रकार की होती है : कैश ( Cache ) मेमोरी , प्राईमरी मेमोरी / मुख्य मेमोरी और सैकंडरी मेमोरी ।


कैश मेमोरी :- कैश ( Cache ) मेमोरी बहुत ही उच्च गति अर्द्ध कंडक्टर ( semiconductor ) मेमोरी होती है जो सीपीयू और मुख्य मेमोरी ( main mernory ) की गति बढ़ा देती है । यहाँ डाटा और प्रोग्राम के उस भाग को रखा जाता जो सीपीयू ( CPU ) द्वारा बार - बार इस्तेमाल किया जाता है डेटा और प्रोग्रामों के कुछ भाग ऑपरेटिंग सिस्टम के द्वारा डिस्क से कैश मेमोरी में स्थानांतरित किए जाते हैं जहाँ सीपीयू उन को एक्सेस ( access ) कर सकता है ।

कैश मेमोरी के निम्नलिखित लाभ हैं :


*कैश मेमोरी मुख्य मेमोरी से तेज होती हैं ।
*  या मुख्य मेमोरी की तुलना में कम समय ( access time ) का उपयोग करती है ।
*  यह अस्थायी उपयोग ( temporary use ) के लिए डेटा स्टोर करती है ।
*   यह ऐसे प्रोग्राम को संग्रहीत ( स्टोर ) करती है जो छोटी अवधि में लिए संग्रहीत ( स्टोर ) किए जा सकते हैं।

कैश मेमोरी की कुछ सीमाएं भी हैं :-
*कैश मेमोरी की सीमित क्षमता होती हैं ।
*यह बहुत महंगी होती है ।
प्राइमरी मेमोरी ( मैन मैमोरी ) :-प्राइमरी मेमोरी केवल उन डेटा और निर्देश को जमा कर के रखती । है जिस पर वर्तमान में कंप्यूटर काम कर रहा है । जब बिजली बंद ( power off ) हो जाती है तब वह मेमोरी डेटा खो देती है । आम तौर पर यह मेमोरी अर्धचालक उपकरणों से बनी होती है - इसका मतलब सिलिकॉन आधारित ट्रांजिस्टर से मिलकर बने हुए एकीकृत सर्किट ( integrated circuits ) होता है । रैम ( RAM - Random Access Memory ) और रोम ( ROM - Read Only Memory ) मुख्य मेमोरी के दो उदाहरण हैं । रैम ( RAM ) वॉलेटाईल मेमोरी है । फ्लैश मेमोरी , रोम / प्रोम ( Programmable ROM ) / EPROM ( Erabsable PROM ) नॉन - वॉलेटाईल मेमोरी के उदाहरण हैं । डेटा और निर्देश ( Instructions ) जो की प्रोसेस करने के लिए आवश्यक है , मुख्य मेमोरी में रहते हैं ।
* मुख्य ( Main ) मेमोरी की विशेषताएँ है :-
* यह कंप्यूटर के काम करने वाली ( working memory ) मेमोरी है ।
*  इसकी गति मुख्यमेमोरी से भी तेज होती है ।
*  एक कंप्यूटर प्राइमरी मेमोरी के बिना नहीं चल सकता है ।
random access memory ( RAM ) :- कंप्यूटर के पढ़ने और लिखने कि मेमोरी ( आर / डब्ल्यू , Read / Write ) को कंप्यूटर मेमोरी कहा जाता है । इसमें उपयोगकर्ता पढ़ने के साथ ही इनफार्मेशन लिख भी सकते हैं । रैम ( RAM ) में किसी भी स्थान का पता निर्दिष्ट करने के बाद उस स्थान तक पहुंचा जा सकता है । RAM को " Random Access " माना जाता है क्योंकि इससे हम किसी भी मेमोरी सेल को सीधा access कर सकते है अगर हमें सेल का एड्रेस पता हो तो स्टोरेज सेल जो कि बहुत सारे ट्रांजिस्टर से मिलकर बने होते हैं , के अंदर डेटा को स्टोर रख सकते हैं |

RAM के दो प्रकार के होते हैं :

डायनामिकरैम ( DRAM )
* स्टेटिकरैम ( SRAM )

*  DRAM से SRAMइस प्रकार से भिन्न है कि वह समय - समय पर रिफ्ररेश होती रहती हैं । SRAM DRAMसे तेज होती है और SRAM की cost ( लागत ) भी ज़्यादा होती है । SRAM सामान्यत : सीपीयू कैश ( CPU Cache ) के लिए उपयोग होती है और DRAMकम्प्यूटर की मुख्य मेमोरी के लिए उपयोग में होती है ।

RAM के कुछ अन्य प्रकार है :


   (a)  EDO ( Extended Data Output ) RAM : EDO RAMs में किसी भी मेमोरी स्थान ( location ) तक पहुंचा जा सकता है । यह 256 इनफार्मेशन बाइट्स latches में स्टोर करता है ।
   (b) SDRAM ( Synchronous DRAMs ) : ये रैम चिप्स उसी clock rate का उपयोग करती हैं जो सीपीयू  करता है ।
   (c) . DDR - SDRAM ( Double Data Rate - SDRAM ) : यह रैम डेटा का स्थानान्तरण घड़ी के दोनों किनारी ( on both edges of the clock ) पर करता है।

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